कुष्ठरोग || Kusth rog :

कुष्ठ रोग विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत रोगियों में यह रोग असंक्रामक किस्म का होता है। मतलब सौ में से अस्सी रोगियों को साथ रखने पर भी यह रोग अन्य स्वस्थ व्यक्तियों में संक्रमण द्वारा नहीं फैलता है। शेष बीस प्रतिशत कुष्ठ रोगियों का भी यदि इलाज समय पर हो जाए तो उनका रोग कुछ ही दिनों में असंक्रामक हो जाता है। कुष्ठ रोग यानि जिसे कोढ भी कहा जाता है।

यह किसी तरह का खानदानी रोग नहीं होता है। यह किसी को भी हो सकता है। इस रोग में रोगी न केवल शारीरक बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित होता है। कुष्ठ रोग दो तरह का होता है। असंक्राम और संक्रामक। इस बीमारी में रोग से ग्रसित अंग सुन्न हो जाता है जिस वजह से रोगी को सर्दी व गर्मी का एहसास नहीं होता है। साथ ही इस रोग में गले, नाक और त्वचा से कोढ़ के कीटाणु बनकर निकलते रहते हैं।

kushtarog ke karan
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कुष्ठ रोग होने के कारण:

  • आयुर्वेद के अनुसार कुष्ठ रोग भोजन के विरुद्ध खाद्य-पदार्थों का सेवन करने से रक्त के दूषित होने पर कुष्ठ रोग की उत्पत्ति होती है
  • जैसे कि मांस का सेवन करने के बाद दूध पी लेना ।
  • कुष्ठ की चिकित्सा में देर होने से शरीर में जीवाणु विकसित होकर रक्त को दूषित करके कुष्ठ रोग की वृद्धि कर चुके होते हैं।
  • कुष्ठ के जख्मों से पूय स्राव होता है। इस पूय में भी कुष्ठ के जीवाणु होते हैं।
  • इस पूय के संपर्क में आने वाले लोग भी कुष्ठ रोग के शिकार हो सकते हैं।
  • जीवाणु के शरीर में पहुंच जाने के लंबे समय बाद कुष्ठ के लक्षण दिखाई देते हैं।
  • एक अनुमान के अनुसार कुष्ठ रोग पीडितो में से अधिकांश व्यक्ति गर्म एवं नम जलवायु वाले क्षेत्रों में मिलते हैं।
  • जबकि ठंडे तथा सूखे जलवायु में कुष्ठ रोगियों की संख्या कम होती है।
  • शरीर में किन्ही कारणों से खून का खराब हो जाना|

कुष्ठ रोग के उपचार के घरेलू नुस्खे हैं:

नीम:

नीम की पत्तियों को पीसकर लेप के रूप में प्रयोग करें। नीम में बैक्टीरिया से छुटकारा पाने के लिए उत्तम एंटीसेप्टिक एजेंट होता है। पत्तियों के लेप को एक दिन में कम से कम दो बार प्रभावित स्थान पर लगाएं। बेहतर परिणाम के लिए नीम के पेस्ट में काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। इसके अलावा नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से नहाने से भी आराम मिलता है।

आंवले का प्रयोग:

आंवले को सुखाकर उसे पीस कर आप उसका चूर्ण बना लें और राेज आंवले के चूर्ण की एक फंकी को पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से कुछ ही महीनों में कुष्ठ रोग ठीक हो सकता है।

एरोमाथेरेपी:

कुष्ठ रोग के इलाज के लिए एरोमाथेरेपी भी ली जा सकती है। इस थेरेपी में विभिन्न गुणकारी तेलों का इस्तेमाल होता है जो कि शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करता है।

हल्दी:

हल्दी में हाइडेकोटायल होता है। हल्दी को पट्टी पर लगाकर प्रभावी स्थान पर बांधा जा सकता है। हल्दी से त्वचा की सूजन, रंजकता आदि कम हो जाती है क्योंकि यह मरहम का काम करती है।

चालमोगा तेल का प्रयोग:

चालमोगा तेल और नीम का तेल दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर कोढ से ग्रसित अंग पर नियमित कुछ दिनों तक लगाते रहने से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। चालमेगा का तेल आपको किसी आयुर्वेद के पंसारी के पास मिल जाएगा।

सावधानी:

उपर बताएं गये कुष्ठ रोग के उपचार के कुछ घरेलू नुस्खे हैं उनका सेवन करने पर कोई असर या प्रभाव नही पड़ता है तो डॉक्टर से सलाह कीजिए |

कुष्ठरोग और इसके पीड़ितों के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिये विश्व कुष्ठरोग दिवस (वर्ल्ड लेप्रसी डे) की स्थापना की गई।

हेल्लो दोस्तों आज की यह पोस्ट केसी लगी कमेन्ट करके जरुर बताना और अच्छी लगी हो तो शेयर करना |

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