Acidity ke kaarn
Acidity ke kaarn

Acidity ke kaarn || एसिडिटी या अम्लपित्त :

हेल्लो दोस्तों आज की इस पोस्ट में Acidity के बारे में सब कुछ जानेगे।

ज्यादा अम्लपित्त या ऍसिडिटी के कारण पेट में जलन होती है। पाचन तंत्र की विकृति के कारण से अपचन होता हैं उसी को आयुर्वेद में अम्लपित्त या एसिडिटी कह देते हैं। शरीर में पित्त बढ़ जाता हैं। ये एसिड इतना खतरनाक होता हैं के इसकी तीव्रता का पता आप इस से लगा सकते हैं के पेट में बनने वाला ये एसिड लोहे के ब्लेड को भी गलने की क्षमता रखता हैं।

Acidity ke kaarn

अम्लपित्त के कारण:

हम जो भी खाते हैं, उसका पाचन बेहद जरूरी होता है। भोजन के पाचन के लिए आमाशय में कई तरह के पाचन रसायनों का स्त्राव होता है जैसे कि हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पेप्सिन।

एसिडिटी की शुरुवात जी मचलने से होती है। ऍसिडिटी का दर्द सादे भोजन से कम होता है, लेकिन तीखे भोजन से तुरंत शुरू होता है। अम्लपित्तवाला दर्द छाती और नाभी के दरम्यान अनुभव होता है। जलन निरंतर होती है लेकिन ऐंठन-दर्द रूक रूक के होता है। कभी कभी दर्द असहनीय होता है।

अम्लपित्त के लक्षण:

अम्लपित्त में इन से परहेज करना चाहिए।

  • शराब नही पीनी चाहिए ।
  • कोल्डड्रिंक या अन्य आर्टिफिशियल पेय न लें।
  • ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना न खाएं।
  • अधिक गर्म काफी व चाय ना पीएं।

अम्लपित्त के सामान्य उपचार:

  • पानी ज्यादा से ज्यादा से पीएं।
  • भोजन बनाने में हींग का प्रयोग करें।
  • खाना समय से खाएं और खाकर कुछ देर टहलें।

अम्लपित्त के आयुवेर्दिक उपचार:

नींबू का प्रयोग:- गुन गुने पानी में एक नींबू निचोड़ करए खाना खाने के एक घंटे के बाद पीने से अम्लपपित्त ठीक हो जाता है।

गाजर व पेठा:- गाजरए फालसे  या पेठा आदि का सेवन किसी न किसी तरह खाने से अम्लपित्त ठीक हो जाती है।

पपीते का सेवन:- पपीते के रस का सेवन रोज करें। क्योंकि यह अम्लपित्त को दबा देता है। जिससे अम्लपित्त नहीं बनता है।

तो अब बताई की आज की यह पोस्ट केसी लगी | धन्यवाद हमसे जुड़ने के लिए |

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