Ear Infection in Hindi || कान में संक्रमण के लक्षण, कारण, इलाज

By | May 12, 2018

Ear Infection in Hindi || कान में संक्रमण के लक्षण, कारण, इलाज:

ईयर इन्फेक्शन अर्थात् कान का दर्द। कान हमारे शरीर की उन इन्द्रियों में से एक है, जो बहुत ही नाजुक होता है, इसलिए हमें इसकी देखभाल बहुत ही अच्छे तरीके से चाहिए, नहीं तो हमें बहुत सी भयानक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि कान में इन्फेक्शन हो जाना आदि। कान के इन्फेक्शन के कारण हमें सुनने में भी दिक्कत हो सकती है।

Ear Infection in Hindi

Ear Infection in Hindi

कान के संक्रमण के प्रकार:

कान को तीन भागों बाहरी कान, मध्य कान और भीतरी कान में बांटा गया है। संक्रमण कान के किसी भी हिस्से में हो सकता है। मुख्य तौर पर होने वाले तीन संक्रमण निम्न हैं

बाहरी कान में संक्रमण:

बाहरी कान का संक्रमण आमतौर पर बाहरी कान तक ही सीमित होता है और यह बैक्टीरियल या फंगल के कारण होता है।

मध्य कान में संक्रमण:

यह संक्रमण भी ओटिटिस माध्यम से आता है जो ज्यादातर नाक या गले में सर्दी, जुकाम और खांसी के कारण होता है। गले और नाक में होने वाली एलर्जी कान को भी प्रभावित करती है। इस दौरान गले और नाक के बैक्टीरिया मध्य कान में पहुंच सकते हैं और संक्रमण पैदा कर सकते हैं।

बाहरी कान में संक्रमण:

आंतरिक कान संक्रमण अमूमन ज्यादा लोगों को नहीं होता। यह कभी-कभी वायरल के दौरान हो सकता है जिसमें रक्त के माध्यम से बैक्टीरिया कान में प्रवेश कर जाते हैं जो कि कई बार सिर में चक्कर आने का कारण बन जाते हैं।

ईयर इंफेक्शन के कारण:

  • कान में चोट का लगना।
  • कान में कीड़े का जाना।
  • कान की मल का बढ़ जाना।
  • कर्कश ध्वनि का लगातार सुनाई देना।
  • तम्बाकू या धूम्रपान।
  • नवजात होने पर स्तनपान न करना।
  • नहाते हुई कान में पानी चले जाना।
  • सर्दी हो जाना।
  • श्वसन सम्बन्धी संक्रमण जैसे जुकाम या साइनस संक्रमण होने पर।

ईयर इंफेक्शन के लक्षण:

  • बच्चा जब ठीक से खाना न खाएं और रोता रहें।
  • संक्रमित कान में बहरापन।
  • कान बहना।
  • कान भरा हुआ होने की अनुभूति होना।
  • टिनिटस कान में घंटियों की आवाजें सुनाई देना।
  • भूख, उल्टी, और गुस्सा या व्यवहार में बदलाव जैसी चीज़ें देखने को मिलती हैं।
  • कानों में संक्रमण के दौरान, नींद न आने जैसी भी समस्या उत्पन्न हो जाती है।

ईयर इंफेक्शन के घरेलू:

जैतून का तेल:

जब भी कान में अधिक मैल जमा हो जाए, तो जैतून का तेल को गर्म करके उसकी कुछ बूंदों को कान में डालें, फिर आप साफ़ कपड़े से कान की मैल को बाहर निकाले।

नमक:

नमक को गर्म करके एक मोटे कपड़े में डालें और फिर इसे अच्छे से बांंध लें, यह अधिक गर्म न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए इसे अधिक समय तक कान पर रखें।

प्याज: 

कान के इन्फेक्शन को दूर करने के लिए प्याज बहुत ही फायदेमंद होता है इसके लिए प्याज के छोटे-छोटे टुकड़ों को गर्म करें, फिर उसे दो- तीन मिनट तक ठंडा करें। ठंडा होने पर जो उसका रस बनता है, उसकी तीन बूंदेंं कान में डालें और दस मिनट बाद उस रस को कान से बाहर निकाल देंं।

लहसुन

लहसुन को तेल में तब तक पकाएं जब तक यह काला न हो जाए। इसको कुछ देर ठंडा होने देंं,  फिर इसकी कुछ बूंदे कान में डाल लेंं।

गर्म पानी की बोतल से कान की सिकाई करें।

तो दोस्तों आज की यह पोस्ट केसी लगी कमेन्ट करके जरुर बताना धन्यवाद् |

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