Elephantiasis Disease || फाइलेरिया (हाथी पांव) के लक्षण और इलाज

By | May 12, 2018

Elephantiasis Disease || फाइलेरिया (हाथी पांव) के लक्षण और इलाज:

फाइलेरिया रोग, जिसे हाथी पांव या फील पांव भी कहते हैं, (Elephantiasis) में अक्सर हाथ या पैर बहुत ज्यादा सूज जाते हैं। इसके अलावा फाइलेरिया रोग से पीड़ित व्यक्ति के कभी हाथ, कभी अंडकोष, कभी स्तन आदि या कभी अन्य अंग भी सूज सकते हैं।

यह बीमारी पूर्वी भारत, मालाबार और महाराष्ट्र के पूर्वी इलाकों में बहुत अधिक फैली है। यह कृमिवाली बीमारी है। यह कृमि लसिका तंत्र की नलियों में होते हैं और उन्हें बंद कर देते हैं। क्यूलैक्स मच्छर के काटने से बहुत छोटे आकार के कृमि शरीर में प्रवेश करते हैं। मलेरिया के कीड़ों की तरह यह कीड़े मनुष्यों और मच्छरों दोनों में छूत पैदा करते हैं।

Elephantiasis Disease

हाथी पांव लक्षण:

  • गले में सूजन आना
  • हल्के बुखार और बार-बार खुजली के रूप में प्रकट होता है।
  • घाव और संक्रमण पैदा होते हैं।
  • गुप्तांग एवं जॉघो के बीच दर्द  रहना
  • हाथ व पैरों में ज़्यादातर सूजन
  • कॅपकॅपी के साथ बुखार आना

अन्य उपाय:

  • पैदल चलना अच्छा व्यायाम है।
  • जितना हो सके अपने पैर को आरामदायक स्थिति  में उठाए रखें।
  • जितना हो सके व्यायाम करें, कहीं भी, कभी भी।

हाथी पांव के घरेलू उपाय:

अदरक:

फाइलेरिया से निजात के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी से सेवन करें। इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।

आंवला:

आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। इसमें एन्थेलमिंथिंक (Anthelmintic) भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने में बेहद लाभप्रद है। आंवला को रोज खाने से इंफेक्शन दूर रहता है।

लौंग: 

लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिए बहुत प्रभावी घरेलू नुस्खा है। लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं और बहुत ही प्रभावी तरीके से परजीवी को रक्त से नष्ट कर देते हैं।

कुल्ठी:

कुल्ठी या हॉर्स ग्राम में चींटियों द्वारा निकाली गई मिट्टी और अंडे की सफेदी मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। इस लेप को प्रतिदिन प्रभावित स्थान पर लगाएं, सूजन से आराम मिलेगा।

तो दोस्तों आज की यह पोस्ट केसी लगी कमेन्ट करके जरुर बताना धन्यवाद् |

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