Gallstones: Pathri ki dawai || गुर्दे और पित्ताशय की पथरी का इलाज

By | May 15, 2018

Gallstones: Pathri ki dawai || गुर्दे और पित्ताशय की पथरी का इलाज:

आजकल पथरी के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। मुख्यत दो प्रकार की पत्थरी होती है। गुर्दे में और पित्ताशय यानि गाल ब्लैडर में। गुर्दे की पथरी उतनी तकलीफदेह नही जितनी पित्ताशय की होती है।

पित्ताशय की पथरी बहुत से लोगों को परेशान करती है। महिलाओं को इस समस्या का सामना अधिक करना पड़ता है। साधारणतया लोग पथरी का मतलब गुर्दे की पथरी ही समझते है।

गुर्दे की पथरी Kidney Stone एक आम समस्या है। गुर्दे की पथरी ठोस आकार की पत्थर की कंकरी जैसी होती है ।  इसके कारण तेज दर्द हो सकता है तथा संक्रमण और दूसरी कई प्रकार की परेशानी हो सकती है।

पित्ताशय की पथरी:

  • पित्ताशय की पथरी लीवर में बनती है। इसके बनने का कारण कोलेस्ट्रॉल होता है।
  • अत्यधिक वसायुक्त भोजन करने से वो सही से पच नहीं पाता और कच्चा रह जाता है।
  • जिससे की कोलेस्ट्रॉल के छोटे छोटे कण बनते हैं।
  • जो पित्त रस के साथ पित्त नलिकाओं से होते हुए पित्ताशय में आ जाते हैं।
  • यह प्रक्रिया इसी तरह चलती रहती है और ये छोटे छोटे कण मिलकर बड़े-बड़े टुकडे बनने लगते हैं।
  • जिन्हें एक्स-रे या अल्ट्रासाउड़ द्वारा देखा जा सकता है।
  • ये बहुत ठोस नहीं बल्कि रबर के टुकड़ो की तरह नरम होते हैं।
  • इनका आकार तकरीबन 10 mm से लेकर 15 mm तक का होता है।

गुर्दे की पथरी:

  • गुर्दे की पथरी क्रिस्टल द्वारा बना कठोर द्रव्य होता है।
  • जो कि हमारी मूत्र से अलग हो जाते हैं।
  • सामान्यत: मूत्र में ऐसे रसायन होते।
  • क्रिस्टल को कठोर द्रव्य बनाने से रोकते हैं।
  • लेकिन ये केमीकल हर किसी में काम नहीं करते जिस बजह से पथरी बननी शुरू हो जाती है।
  • लेकिन यदि ये क्रिस्टल काफी कम रहते हों तो वो मूत्रमार्ग में आ जाते हैं।
  • और बिना पता चले मूत्र के साथ हमारे शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
  • गुर्दे की पथरी हर उम्र के लोगों में देखी जा चुकी है लेकिन ये युवाओं में कम ही पायी जाती है।
  • उम्र के साथ साथ पित्ताशय के बढ़ने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

पथरी बनने के कारण:

  • पित्त
  • पित्त में कोलेस्ट्रॉल की अत्यधिकता।
  • और पित्त लवण की कम आपूर्ति।
  • पित्त में लेसिथिन।
  • गुर्दे
  • गुर्दे जब पेशाब के द्वारा अनुपयोगी पदार्थ बाहर निकालते है।
  • तो उन्हें पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है।
  • यदि पानी कम होता है तो अपशिष्ट पदार्थ जमना शुरू हो जाते है।
  • ये जमकर सख्त हो जाते है। इस तरह गुर्दे में पथरी बन जाती है।
  • आनुवंशिकता के कारण।
  • मक वाला भोजन या कुछ विशेष प्रकार की दवा आदि के कारण भी पथरी बन सकती है।

पथरी के लक्षण:

  • पित्त
  • वसायुक्त भोजन खाने के बाद पेट के दर्द में तेजी आना, पीलिया, बुखार।
  • दर्द छाती, कंधे, गर्दन में भी फैल सकता है।
  • पेट और पीठ में अचानक दर्द उठना।
  • गुर्दे
  • कंपकंपी,  बार बार पेशाब की इच्छा पर कम पेशाब आना आदि।
  • पेशाब गुलाबी होना , पेशाब भूरा होना ,पेशाब लाल रंग का आना हो सकता है।
  • मूत्र नली नाजुक होने के कारण छिल जाती है।

गुर्दे की पथरी के घरेलु उपाय:

  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का उपयोग होता है।
  • शिकंजी , शरबत , छाछ , जूस , नारियल पानी , सूप आदि लेने चाहिए ।
  • तुलसी के सूखे पत्ते 20  ग्राम , अजवाइन  20 ग्राम , सेंधा नमक 10  ग्राम।
  • ये तीनो मिलाकर बारीक पीस लें।
  • इसमें से आधा चम्मच सुबह और आधा चम्मच शाम को गुनगुने पानी के साथ लेने से पथरी के दर्द में बहुत आराम मिलता है।
  • कुलथी के उपयोग से पथरी में बहुत लाभ होता है। कुलथी की दाल बना कर खाएं ।
  • मूली का रस 25 ग्राम तथा यवक्षार एक ग्राम मिलाकर लेने से पथरी गल कर निकल जाती है।
  • छाछ में अजवाइन का चूर्ण मिलाकर पीने से किडनी स्वस्थ रहती है।

पित्ताशय की पथरी के घरेलू उपाय:

  • पुदीना को पाचन के लिए सबसे अच्छी घरेलू औषधि माना जाता है।
  • जो पित्त वाहिका तथा पाचन से संबंधित अन्य रसों को बढ़ाता है।
  • पुदीना में तारपीन भी होता है जो कि पथरी को गलाने में सहायक माना जाता है।
  • पुदीने की पत्तियों से बनी चाय गॉल ब्लेडर स्टोन से राहत दे सकती है।
  • सेब में पित्त की पथरी को गलाने का गुण होता है।
  • लेकिन इसे जूस के रूप में सेब के सिरके के साथ लेने पर यह ज्यादा असरकारी होता है।
  • सेब में मौजूद मैलिक एसिड पथरी को गलाने में मदद करता है।
  • तथा सेब का सिरका लिवर में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता, जो पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • यह घोल न केवल पथरी को गलाता है बल्कि दोबारा बनने से भी रोकता है।

तो दोस्तों आज की यह पोस्ट केसी लगी कमेन्ट करके जरुर बताना धन्यवाद् |

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