हलासन योग:

इस योग का नाम हलासन केसे पड़ा इस आसन को करते समय शरीर का आकार, किसानों द्वारा जमीन जोतने के लिए उपयोग में लाऐ  जाने वाले उपकरण ‘हल’ के समान होने के कारण इस आसन को हलासन यह नाम दिया गया हैं।

हलासन योग करने की विधी:

  • चटाई बिछा ले और बाद में सर्वांगासन की शुरुआत की तरह जमीन पर पीठ के बल लेट जाए।
  • दोनों पैरों को एक दुसरे के साथ मिलाकर रखना हैं।
  • हथेलियों को कमर के पास जमीन पर रखे।
  • मुंह आकाश की ओर रखे और आँखों को बंद कर ले।
  • शरीर को आराम से छोड़ दे ।
  • अब श्वास अंदर ले और पेट को सिकुड़कर पैरों को उठाना चालू करे।
  • दोनों पैरों का शरीर से समकोण (90 डिग्री एंगल ) बनने पर श्वास छोड़े।
  • सर्वांगासन की स्थिति में आने के बाद दोनों पैरो को सिर के पीछे जमीन पर टिकाने का प्रयास करे।
  • कमर और पीठ को पीछे झुकाने के लिए हाथों का सहारा ले।
  • अपने क्षमतानुसार इस स्थिति में रुकने के बाद, धीरे-धीरे पीठ और पैर को जमीन से लगाना शुरू करे।
  • पुरे आसन में पेरो को मोड़ना नही है |halasana yoga benefits in hindi

हलासन योग करने के लाभ:

  •  इस आसन को करने से हमारी पीठ, कमर, गर्दन मजबूत होते हैं।
  •  इस आसन को करने से सिरदर्द, अनिद्रा ओर बांंझपन जैसी समस्याएँ खत्म हो जाती है।
  •  इसको करने से शरीर बलवान और तेजस्वी बनता है।
  •  इस आसन को करने से कब्ज, खांसी, दमा जैसी बीमारियाँ नहीं लगती।
  •  इस आसन को करने से हमारा रक्त संचार तेजी से काम करता है।
  •  इस आसन को करने से पेट या कमर में अधिक चर्बी कम हो जाती है |
  • इस आसन को करने से हमारा खाना सही तरीके से और अच्छे से पच जाता है।

हलासन योग करने से पहले सावधानी :

हाई बी पी ,चक्कर आना , कमर दर्द , गर्दन में दर्द , हड्डी में क्षय रोग , बोन टी बी , हार्ट डिजीज , गर्भावस्था इस प्रकार की बीमारीयों से पीड़ित लोग हलासन योग नही करना चाहिए |

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