Matsyasana || मत्स्यासन योग

By | April 14, 2018

Matsyasana || मत्स्यासन योग:

योग की कई क्रियाओ में से एक है “मत्स्यासन”मत्स्यासन संस्कृत शब्द मत्स्य से निकला है जिसका अर्थ होता है मछली। इस आसन के दौरान शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, इसलिए इस आसान को मत्स्यासन नाम दिया गया है| अंग्रेजी में इसे फिश पोज़ के नाम से भी जाना जाता है|

matsyasana yoga in hindi

 

मत्स्यासन योग कैसे करें ?

  • मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम पद्मासन में बैठ जाए।
  • अब पीछे की और झुखे और लेट जाये|
  • बाएं पांव को दाएं हाथ से पकड़े और दाएं पांव को बाएं हाथ से पकड़ें।
  • कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दें।
  • घुटने जमीन से सटे होनी चाहिए
  • अब आप सांस लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर लेकर जाएं।
  • या हाथ के सहायता से भी आप अपने सिर को पीछे गर्दन की ओर कर सकते हैं।
  • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • इस अवस्था को अपने हिसाब से मेन्टेन करें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए अपने आरम्भिक अवस्था में आएं। यह एक चक्र हुआ।

मत्स्यासन करने के फायदे:

  • स्त्रियों के गर्भाशय और मासिक धर्म संबंधी रोग दूर होते हैं।
  • यह आसन टांसिल, मधुमेह,घुटनों तथा कमर के दर्द के लिए लाभदायक है।
  • आँखों से संबंधित सभी दोषों को दूर करता है।
  • पेट तथा गर्दन की चर्बी तथा खांसी को दूर कर सकते हैं।
  • त्वचा (चर्म) रोगों को दूर करता है।
  • शुद्ध रक्त का निर्माण तथा संचार करता है।
  • यह आसन चेहरे और त्वचा को आकर्षक तथा शरीर को कांतिमान बना देता है।
  • इस आसन के द्वारा ग्रीवा की कशेरूका और मांसपेशियां आगे-पीछे खिंचने से लचीली व मजबूत बनती है|
  • रीढ़ के विकार दूर हो जाते हैं।
  • कब्ज दूर कर भूख बढ़ाता है तथा भो

सावधानिया:

  • घुटनों में दर्द, उच्च रक्तचाप, स्लिप डिस्क, ओर रीढ़ की समस्या होने पर इसे न करें।
  • छाती व गले में अत्यधिक दर्द या अन्य कोई रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें।
  •  कम आयु के बच्चे को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • माइग्रेन और अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।

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