Snoring in hindi || सोते समय खर्राटे लेना के उपचार

By | June 1, 2018

Snoring in hindi || सोते समय खर्राटे लेना के उपचार:

खर्राटे लेना एक बहुत ही आम समस्या है। हममें से बहुत से लोग इस समस्या से पीड़ित होंगे। हम सभी इसके प्रति लापरवाही दिखाते हैं और इसे गंभीरता से नहीं लेते, परंतु खर्राटे आना अच्छे स्वास्थ्य का सूचक नहीं है।

लोगों में एक भ्रामक धारणा यह भी है कि खर्राटे गहरी नींद में होने के कारण आते हैं परंतु सच तो यह है कि खर्राटों के कारण व्यक्ति ठीक से अपनी नींद पूरी नहीं कर पाता। रात में नींद में अवरोध होने के कारण खर्राटे भरने वाले दिन में सुस्त दिखाई देते हैं और दिन में सोने की इच्छा भी रखते हैं।

कई बार वायुमार्ग के पास अतिरिक्त टिश्यू जमा हो जाते हैं या वायुमार्ग से जुड़ी मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं,  जिससे वायु के प्रवाह में रुकावट आती है। इससे सांस सामान्य रूप से नहीं आता और खर्राटे की समस्या शुरू हो जाती है। बंद मुंह से खर्राटे लेना जीभ की संरचना में समस्या का संकेत है,  वहीं खुले मुंह से खर्राटे लेने का संबंध गले के टिश्यू से हो सकता है।

खर्राटे लेते समय जो आवाज आती है,  वह तालू के टिश्यू और गले के पिछले भाग में लटके टिश्यू में कंपन के कारण आती है। सर्दी या एलर्जी के कारण आने वाले खर्राटे अस्थायी होते हैं। इसी तरह गर्भावस्था के दौरान  भी गले में फैटी टिश्यू जमा होने के कारण कुछ महिलाएं खर्राटे लेती हैं।

कई बार खर्राटे हल्की आवाज में आते हैं लेकिन अक्सर ये आवाजें इतनी तेज और कठोर होती हैं कि साथ सोने वाले शख्स की नींद उड़ा देती हैं। खर्राटों का इलाज समय पर न किया जाए तो यह स्लीप एप्निया की वजह बन सकता है।Snoring Symptoms

Snoring Symptoms || खर्राटे लेना के लक्षण:

खर्राटे लेना का उपचार:

  • धूम्रपान की लत से बचें
  • करवट से सोएं
  • नींद की गोलियों लने से बचें
  • एक्‍सरसाइज करें
  • नमक कम खाएं
  • भोजन की मात्रा कम लें
  • सोते समय मन को शांत व मस्तिष्क को बाहरी विचारों से मुक्त रखकर सोना चाहिए।
  • ऐसे में गले के आस-पास बहुत अधिक वसा युक्त कोशिकाएं जमा हो जाती हैं
  • जिनसे गले में सिकुड़न होती है और खर्राटे की ध्वनि निकलती है।
  • यह हवा के रास्ते को भी रोकता है जिससे भी सोते वक्त खर्राटे अधिक होते हैं।
  • तो अगर आप खर्राटे से छुटकारा चाहते हैं तो वजन जरूर घटाएं।
  • जब शरीर में पानी की कमी होती है तो नाक के रास्ते की नमी सूख जाती है।
  • ऐसे में साइनस हवा की गति को श्वास तंत्र में पहुंचने के बीच में सहयोग नहीं कर पाता और सांस लेना कठिन हो जाता है।
  • ऐसे में खर्राटे की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

 

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