Sukhasana-सुखासन योग कैसे करें, लाभ और सावधानियां

By | April 27, 2018

Sukhasana-सुखासन योग:

सुखासन का शाब्दिक अर्थ होता है सुख देने वाला आसन। जब भी हम इस आसन को करते हैं, तो सच में ही हमें आत्मीय शांति और सुख की प्राप्ति होती है, यही कारण है कि हम इस आसन को सुखासन के नाम से जानते हैं। सुखासन बैठकर या फिर इसे पलथी मार कर किया जाने वाला आसन होता है, लेकिन आज समय कुछ ऐसा है कि हमारे पास पलथी मारकर बैठने का समय नहीं है। प्राचीन समय में लोग पलथी मारकर खाना खाते थे। लेकिन अब समय कुछ ऐसा है जिसमें लोग नीचे बैठकर खाना नहीं खाते बल्कि टेबल पर बैठकर ही खाना खाते हैं।

Sukhasana benefits in hindi

सुखासन योग करने  की विधी:

सुखासन में दोनों पैरों को एक क्रॉस की मुद्रा में दबाकर रखा जाता है जिसे कमल मुद्रा भी कहते है ध्यान के लिए यह उपयुक्त आसन होता है| आइये जानते हैं।

  • समतल जमीन पर आसान बिछाकर पालथी मोड़कर बैठ जाएं।
  • अपने सिर गर्दन और पीठ को सीधा रखें, उन्हें झुकाएं नहीं।
  • कंधो को थोड़ा ढीला छोड़े।
  • दोनों हाथों को घुटनों पर तथा हथेलियों को ऊपर की और रखें।
  • सिर को थोड़ा ऊपर उठाये और आँखे बंद कर लें।
  • अब अपना ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर लगाएं और लम्बी और गहरी सांस लेते रहे।
  • इस आसन को कभी भी एकांत में बैठकर 5-10 मिनट तक कर सकते है।
  • अगर आप आध्यात्मिक दृष्टि से यह योग कर रहे है तो पूर्व या उत्तर दिशा में इसे करें।

सुखासन योग करने के फायदे:

  • इस आसन को  करने से मन में शांति तथा एकाग्रता बढ़ती है|
  • रीड की हड्डियों की परेशानियों से निजाद मिलता है|
  • सुखासन से मानसिक तनाव कम होता है साथ ही मन में सकारात्मक विचारों को उत्पत्ति होती है|
  • इस आसन से छाती और पैर मजबूत होते है तथा वीर्य रक्षा में मदद मिलती है|
  • इस आसन को करने से  शरीर में रक्त का संचार एकसमान होता है| जिससे शरीर अधिक ऊर्जावान बनता है|
  • सुखासन में बैठकर खाना खाने से मोटापा, कब्ज, अपच आदि पेट से संबंधित बीमारियों से छुटकारा मिलता है|

सावधानियां: 

  • पैरों में किसी भी प्रकार का अत्यधिक कष्ट हो तो यह आसन न करें।
  • साइटिका अथवा रीढ़ के निचले भाग के आसपास किसी प्रकार का दर्द हो या घुटने की गंभीर बीमारी में इसका अभ्यास न करें।

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