Typhoid ke lakshan

Typhoid ke lakshan || टाइफाइड के घरेलू उपचार:

टाइफायड साल्मोनेला बैक्टीरिया से फैलने वाली खतरनाक बीमारी है। इसे मियादी बुखार भी कहते हैं। टाइफायड  बुखार पाचन तंत्र और ब्लटस्ट्रीम में बैक्टीरिया के इंफेक्शन की वजह से होता है। गंदे पानी, संक्रमित जूस या पेय के साथ साल्मोनेला बैक्टीरिया हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है। टायफायड की संभावना किसी संक्रमित व्यक्ति के जूठे खाद्य-पदार्थ के खाने-पीने से भी हो सकती है।

इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति जब खुले में मल त्याग करता है, तो ये बैक्टीरिया वहाँ से पानी में मिल सकते हैं, मक्खियों द्वारा इन्हें खाद्य पदार्थों पर छोड़ा जा सकता है और ये स्वस्थ व्यक्ति को रोग का शिकार बना देते हैं।

यह रोग दुनिया के उन देशों में पाया जाता है, जहाँ मल-मूत्र और गंदगी के सही निपटाने की व्यवस्था नहीं है अथवा पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है। एक और गंभीर बात यह है कि आजकल 50 प्रतिशत रोगियों में जीवाणु प्रतिरोधक दवाइयाँ असर नहीं कर रही हैं, क्योंकि जीवाणुओं ने इन दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। भारत में हर साल लगभग 4 लाख लोग इस टाइफाइड से प्रभावित होते हैं। Typhoid ke lakshan

Typhoid Symptoms || टाइफाइड के लक्षण:

  • गले में दर्द या सूजन भी हो सकती है।
  • टाइफाइड में सीने और पेट पर चमकीले गुलाबी दाने दिखते हैं।
  • रोगी अत्यंत चिड़चिड़ा हो सकता है।
  • रोग की गंभीर स्थिति में बेहोशी भी आ सकती है।
  • बुखार शुरू में हल्का, पर धीरे-धीरे तेज होता जाता है।
  • कब्ज या दस्त होना।
  • तेज बुखार या ठंड लगना।
  • कमजोरी और उल्टी  जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

Typhoid Causes || टाइफाइड के कारण:

  • खुले मैदानों या खेतों में शौच जाने की आदत।
  • पीने के पानी के पाइप गंदी नालियों में से होकर जाने के कारण टाइफाइड फैलता है।
  • यह रोग अक्सर संक्रमित अंडे खाने से भी शरीर में जाता है।
  • ज्यादातर मुर्गियों में सालमोनेला इंफेक्शन होता है। जो अंडे द्वारा इंसानों में आ जाता है।
  • इसलिए मुर्गी के अंडे को ठीक से पकाकर ही खाना चाहिए।
  • बार-बार बुखार आने पर ठीक से इलाज नहीं करवाने से शरीर कमजोर हो जाता है।
  • जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है।
  • शौच के बाद साफ-सफाई का ध्यान ना रखना।

टाइफाइड का घरेलू उपचार:

  • पके हुए केले को पीसकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार खाएं।
  • तुलसी और सूरजमुखी के पत्तों का रस निकालकर पीने से टाइफायड में राहत मिलती है।
  • पानी खूब पीएं और पीने के पानी को पहले गर्म करें और उसे ठंडा होने के बाद पीये।
  • अधिक पानी पीने से शरीर का जहर पेशाब और पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।
  • फ्लू में प्याज का रस बार-बार पीने से बुखार उतर जाता है,और कब्ज में भी आराम मिलता है।
  • लहसुन की एक कली को पीसकर गरम पानी में मिलाएं। 10 मिनट ढक कर रखें।
  • पानी को छान लें और घूंट घूंट करके धीरे धीरे पीएं।
  • तेज बुखार आने पर माथे पर ठंडे पानी का कपड़ा रखें तो बुखार उतर जाता है,और बुखार की गर्मी सिर पर नहीं चढ़ती है।
  • टाइफाइड की दवा को बीच में न छोड़ें।
  • डॉक्टर के परामर्श से ब्लड टेस्ट के बाद ही डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही चिकित्सा कराएं।

 

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