Ulcer In Hindi || अल्सर के उपचार

By | June 6, 2018

Ulcer In Hindi || अल्सर के उपचार:

Ulcer अल्सर आपकी छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में होने वाले फोड़े या जख्म होते हैं | जब भोजन पचाने वाले एसिड्स आमाशय या छोटी आंत की भित्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तब अल्सर विकसित होते हैं |

यह हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नाम के एक जीवाणु के संक्रमण से होता है। कुछ लोगों में अल्सर के लक्षण आसानी से जबकि दूसरों में ये जल्दी नहीं दिखाई पड़ते हैं। कभी-कभी अल्सर उन्हें भी हो जाता है, जिन्होंने इसके किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं किया है।Ulcer In Hindi

Ulcer Symptoms || अल्सर के लक्षण:

Ulcer Causes || अल्सर के कारण:

  • लगातार शराब पीने वाले लोगो को होने का खतरा रहता।
  • अधिक चाय, कॉफ़ी का सेवन करने वाले व्यक्तियों को होता है।
  • अधिक गर्म खट्टे, मिर्च मसलों वाला भोजन करने के कारण हो सकता है।
  • 50 साल से अधिक उम्र के लोग।

अल्सर से बचाव के लिए घरेलू उपचार:

गाय का दूध:

हल्दी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, गाय के दूध में हल्दी मिलाकर पीने से भी अल्सर रोगियों को लाभ मिलता है।

केला:

दो केले लें और उन्हें छिल लें। इसके बाद इन केले के गुदे को मैश कर लें और उसमें थोडा सा तुलसी के पत्तों का रस मिला दें। इसके बाद इसका सेवन करें। आपको अल्सर के रोग में काफी राहत मिलेगी।

पत्ता गोभी और गाजर:

पत्ता गोभी और गाजर को बराबर मात्रा में लेकर जूस बना लीजिए, इस जूस को सुबह-शाम एक-एक कप पीने से पेप्टिक अल्सर के मरीजों को आराम मिलता है।

नारियल:

नारियल के दूध और पानी में भी एंटी- अल्सर गुण पाये जाते हैं। अल्सर के उपचार के लिए रोजाना नारियल पानी पीएं। नारियल के तेल का सेवन भी अल्सर से बचाता है।

आंवले का मुरब्बा:

अगर अल्सर के रोग से पीड़ित व्यक्ति दिन में एक बार आंवले के मुरब्बे के रस में आधा गिलास अनार का जूस मिलाकर पियें तो भी उसे इसरोग से जल्द ही आराम मिल जाता हैं।

गुड़हल:

गुड़हल के लाल फूलों को पीसकर, पानी के साथ इसका शर्बत बनाकर पिएं। पेट के अल्सर के लिए यह एक उत्तर दवा है।

छाछ की पतली कढ़ी:

छाछ की पतली कढ़ी बनाकर रोगी को रोजाना देनी चाहिये, अल्सर में मक्की की रोटी और कढ़ी खानी चाहिए, यह बहुत आसानी से पच जाती है।

पोहा:

पोहा बिटन राइस और सौंफ को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। 20 ग्राम चूर्ण को 2 लीटर पानी में सुबह घोलकर रख लें और रात में पूरा पी जाएं। रोज सुबह तैयार करें और दोपहर बाद या शाम से पीना शुरू कर दें। इस घोल को 24 घंटे में खत्म कर देना है।

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