Whooping Cough in hindi || काली खांसी का उपचार

By | June 7, 2018

Whooping Cough in hindi || काली खांसी का उपचार:

काली खांसी एक श्वसन संबंधी बीमारी है। माना जाता है कि काली खांसी बच्चों की बीमारी है लेकिन ऐसा नहीं है। यह बड़ों को भी हो जाती है। यह खतरनाक बीमारी है क्योंकि यह संक्रामक होती है यानी इस बीमारी के वायरस हवा के जरिये एक इंसान से दूसरे तक पहुंचते हैं।

बार-बार खांसी होने और उल्टी होने से बच्चे शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो जाते हैं। कुछ भी खाते-पीते समय खांसी का दौरा प्रारंभ हो जाता है। लगातार खांसी का दौरा चलने पर उल्टी होती है।

6 महीने से कम उम्र के बच्चों में इस बीमारी से मृत्यु दर अधिक होती है। हालांकि यह बीमारी साल के किसी भी महीने में हो सकती है।Whooping Cough in hindi

Whooping Cough Symptoms || काली खांसी के लक्षण:

  • सूखी और उत्तेजित खाँसी
  • हल्का बुखार
  • आँखों में पानी आना
  • गले की नसों का फूल जाना
  • हल्की और कभी-कभी खांसी
  • नाक से द्रव बहना
  • सांस लेने में घुर घुर की आवाज आना
  • खांसी के दौरान या बाद में उल्टी होना
  • वहाँ से मुंह और नाक बलगम की एक गंभीर निर्वहन हो सकता है।
  • सांस बंद होने का एहसास होना

Whooping Cough Causes || काली खांसी के कारण:

  • संक्रमित व्यक्ति रोग की शुरुआती अवस्था से लेकर खाँसी शुरू होने के 2 सप्ताह बाद तक अत्यंत संक्रमणकारी होते हैं।
  • कुकर खाँसी बोर्डेटेला पर्टुसिस नामक बैक्टीरिया द्वारा होती है।
  • बैक्टीरिया एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमित व्यक्ति की नाक और मुँह द्वारा निकले सूक्ष्म तरल कणों से फैलता है।
  • कुछ बच्चों को काली खांसी का रोग एलर्जी के कारण होता है।
  • एलर्जिक वस्तु के संपर्क में आने पर सांस लेने में परेशानी होती है। गले में जलन व खुजली होती है।
  • अधिक सर्दी लगने, पानी में अधिक भीगने व सर्दी के दिनों में नंगे पांव घूमने से सर्दी-जुकाम होता है।
  • ऐसे में कुछ बच्चे मूंगफली, अखरोट व अन्य कोई मेवा और घी, तेल मक्खन से बनी चीजें खाकर ठंड़ा पानी पीते हैं।
  • तो उन्हें खांसी हो जाती है।

काली खांसी का घरेलू उपचार:

तुलसी के पत्ते:

काली खांसी से राहत के लिए तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसे दिन में तीन बार चूसें। ये गोलियां खांसी को मिटाकर गला साफ कर देती हैं।

अदरक:

अदरक के रस को शहद में मिलाकर 2-3 बार चाटने से काली खांसी का असर खत्म हो जाता है।

लोंग:

लोंग को आग पर भूनकर शहद के साथ चाटने से काली खांसी में लाभ होता है।

लहसुन:

5-6 कलियों को छीलकर बारीक काट लें। उन्हें पानी में उबाल लें। इस पानी से भाप लें। रोज ऐसा करने से 8-10 दिन में काली खांसी खत्म हो जाती है।

पीपल:

पीपल, काकड़ासिंगी, अतीस और बहेड़ा सभी औषधियों को 20-20 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक कूट-पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। इसमें 10 ग्राम नौसादर, 10 ग्राम भुना हुआ सुहागा मिलाकर पीस लें। इसके 3 ग्राम चूर्ण को दिन में 2-3 बार चाटने से काली खांसी दूर हो जाती है।

बादाम:

3 बादाम रात को पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर बादाम के छिलके उतारकर लहसुन की एक कली और मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को बच्चों को खिलाने से काली खांसी दूर हो जाती है।

पान के पत्तों:

पान के पत्तों के 3 ग्राम रस में शहद मिलाकर 1-1 बार चटाने से भी काली खांसी में बहुत लाभ मिलता है।

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