Yellow Fever in hindi || पीला बुखार का उपचार:

पीतज्वर या Yellow fever एक संक्रामक तथा तीव्र रोग हैं जो अचानक शुरू होता है। इस रोग का कारक एक सूक्ष्म विषाणु (Flavivirus) होता है, जिसका संवहन एडीस ईजिप्टिआई जाति के मच्छरों द्वारा होता है।

यह एक सं‍क्रमित रोग है। इस रोग को पैदा करने वाले मच्‍छर बंदरगाहों और जहाज के आसपास पैदा होते हैं इसलिए इनको बंदर-मच्‍छर भी कहा जाता है। यह सिस्टमिक रोग है अर्थात यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है।

रोग के नाम में येलो शब्द पीलिया को इंगित करता है जो कुछ रोगियों को प्रभावित करता है। यह ऐसा रोग है जो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। Typhoid ke lakshan

Yellow Fever Symptoms || पीला बुखार के लक्षण:

  • ठंड के साथ बुखार आना
  • अनियमित ह्रदय गति।
  • मितली आना
  • पीठ में दर्द होना
  • माँसपेशियों में दर्द।
  • आँखें लाल होना।
  • पीलिया
  • झटके आना
  • खून की उल्टी होना।

Yellow Fever Causes || पीला बुखार के कारण:

  • जब संक्रमित मच्छर किसी अन्य वानर या मनुष्य को काटता है
  • तो वायरस इनके रक्तप्रवाह में प्रविष्ट हो जाता है, जहाँ ये रोग उत्पन्न करता है।
  • वायरस मच्छर के रक्तप्रवाह में प्रविष्ट हो जाता है और भ्रमण करते करते लार उत्पन्न करने वाली ग्रंथियों में जाकर ठहर जाता है।

पीला बुखार का घरेलू उपचार:

नारियल पानी:

यह शरीर को हाइड्रेट करके अन्य पोषक तत्वों की पूर्ति करता है। एक दिन में कम से कम तीन से चार बार नारियल पीएं।

प्याज:

प्याज को गर्म करके इसका रस निकाल लें और फिर शहद की कुछ बूंदे डालकर अच्छे से मिलाएं। उसका सेवन करे

तुलसी और काली मिर्च:

आधा लिटर पानी में आधा चम्मच काली मिर्च और कुछ तुलसी के पत्ते डाल कर उबालें। इस पानी में तीन चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने से आप ठीक हो जाएंगे।

नींबू और नमक
एक गिलास पानी में नींबू के रस की कुछ बूंदे और नमक मिलाकर पीने से रोगी को देने से उसे बुखार में राहत का एहसास होता है और इससे रोगी में पानी की कमी पूरी हो जाती है साथ ही उसे ऊर्जा भी मिलती है।

 

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