Yoga for cervical spondylosis in hindi || गर्दन दर्द को योग द्वारा ठीक करना

By | May 30, 2018

Yoga for cervical spondylosis in hindi || गर्दन दर्द को योग द्वारा ठीक करना:

स्पोंडिलोसिस के लक्षण, कारण, उपचार के बारे में जानने के लिए यहाँ पर क्लिक करे

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए योगाभ्यास:

1. धनुरासन योग || Dhanurasan:

इस आसन का नाम उसे अपनी धनुषी आकार की वजह से मिला है| धनुरासन, पद्म साधना की श्रेणी में से एक आसन है| इसे सही तौर पर धनु-आसन के नाम से जाना जाता है| धनुरासन करने पर शरीर “धनुष” आकार की तरह दृश्यमान होता है, इसलिए यह आसन धनुरासन कहा गया है। यह आसन कमर और रीड़ की हड्डी के लिए अति लाभदायक होता है। शुरुआत में लोग धनुरासन करने से घबराते हैं लेकिन अगर आप इनके सरल तरीकों को जान जाए तो आसानी से इसका अभ्यास कर सकते हैं।

Dhanurasana Yoga in hindi

धनुरासन योग करने की विधी:

  • सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाए।
  • पैरो मे नितंब जितना फासला रखें और दोनों हाथ शरीर के दोनों ओर सीधे रखेंl
  • घुटनों को मोड़ कर कमर के पास लाएँ
  • सांस लेते हुए आप अपने सिर, चेस्ट एवं जांघ को ऊपर की ओर उठाएं।
  • अपने शरीर के लचीलापन के हिसाब से आप अपने शरीर को और ऊपर उठा सकते हैं।
  • शरीर के भार को पेट निचले हिस्से पर लेने की कोशिश करें।
  • धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े। अपने हिसाब से आसन को धारण करें।
  • जब आप मूल स्थिति में आना हो तो लम्बी गहरी सांस छोड़ते हुए नीचे आएं।
  • यह एक चक्र पूरा हुआ।
  •  शुरुआत में इस तरह से आप 3-4 चक्र करने की कोशिश करें।

धनुरासन के लाभ:

  • इस योग के अभ्यास से तनाव और थकान से निजाद
  • रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनती हैं।
  • यह योग वज़न कम करने के लिए एक उत्तम योग है। इसके नियमित अभ्यास से पेट की चर्बी कम होती है और आपके पेट को चुस्त-दुरुस्त बनाता है।
  • इस योग के अभ्यास से कब्ज एवं अपच को दूर किया जा सकता है। यह आसान सही तरीके से एंजाइम के स्राव में मदद करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है।
  • मलावरोध तथा मासिक धर्म में सहजता |
  • महिलाओं में यह आसन करने मासिक धर्म संबंधी विकार दूर करने में मदद मिलती हैं।
  • धनुरासन करने से छाती, जांघें और कंधे मज़बूत बनते हैं।

धनुरासन की सावधानियाँ:

  • उक्त रक्त चाप वाले व्यक्ति इस अभ्यास को विशेषज्ञ के परामर्श से करें।
  • अगर पथरी की शिकायत हो तो इसे न करें
  • साइटिका से ग्रस्त व्यक्ति इसको करने से पहले विशेषज्ञ का परामर्श लें ।
  • धनुरासन उन्हें नहीं करनी चाहिए जिन्हें तीव्र कमर दर्द और हाथ में दर्द हो।

2. Matsyasana || मत्स्यासन योग:

योग की कई क्रियाओ में से एक है “मत्स्यासन”मत्स्यासन संस्कृत शब्द मत्स्य से निकला है जिसका अर्थ होता है मछली। इस आसन के दौरान शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, इसलिए इस आसान को मत्स्यासन नाम दिया गया है| अंग्रेजी में इसे फिश पोज़ के नाम से भी जाना जाता है|

matsyasana yoga in hindi

 

मत्स्यासन योग कैसे करें ?

  • मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम पद्मासन में बैठ जाए।
  • अब पीछे की और झुखे और लेट जाये|
  • बाएं पांव को दाएं हाथ से पकड़े और दाएं पांव को बाएं हाथ से पकड़ें।
  • कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दें।
  • घुटने जमीन से सटे होनी चाहिए
  • अब आप सांस लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर लेकर जाएं।
  • या हाथ के सहायता से भी आप अपने सिर को पीछे गर्दन की ओर कर सकते हैं।
  • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • इस अवस्था को अपने हिसाब से मेन्टेन करें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए अपने आरम्भिक अवस्था में आएं। यह एक चक्र हुआ।

मत्स्यासन करने के फायदे:

  • स्त्रियों के गर्भाशय और मासिक धर्म संबंधी रोग दूर होते हैं।
  • यह आसन टांसिल, मधुमेह,घुटनों तथा कमर के दर्द के लिए लाभदायक है।
  • आँखों से संबंधित सभी दोषों को दूर करता है।
  • पेट तथा गर्दन की चर्बी तथा खांसी को दूर कर सकते हैं।
  • त्वचा (चर्म) रोगों को दूर करता है।
  • शुद्ध रक्त का निर्माण तथा संचार करता है।
  • यह आसन चेहरे और त्वचा को आकर्षक तथा शरीर को कांतिमान बना देता है।
  • इस आसन के द्वारा ग्रीवा की कशेरूका और मांसपेशियां आगे-पीछे खिंचने से लचीली व मजबूत बनती है|
  • रीढ़ के विकार दूर हो जाते हैं।
  • कब्ज दूर कर भूख बढ़ाता है तथा भो

सावधानिया:

  • घुटनों में दर्द, उच्च रक्तचाप, स्लिप डिस्क, ओर रीढ़ की समस्या होने पर इसे न करें।
  • छाती व गले में अत्यधिक दर्द या अन्य कोई रोग होने की स्थिति में यह आसन न करें।
  •  कम आयु के बच्चे को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • माइग्रेन और अनिद्रा से पीड़ित व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।

3. Bhujangasana || भुजंगासन क्या है ?

भुजंगासन को कोबरा पोज़ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर के अगले भाग को सर्प के फन के तरह उठाया जाता है। भुजंगासन की जितनी भी फायदे गिनाए जाएं कम है। यह सिर से लेकर पैर की अंगुलियों तक फायदा पहुंचाता है। यह आसन शरीर को लचीला और फुर्तीला बनाये रखने में सक्षम होता है।

bhujangasana benefits in hindi

भुजंगासन कैसे करे:

Cobra Yoga Pose करने के लिए सर्वप्रथम पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद हथेली को कंधे के सीध में रखे| आपके दोनों पैरों के बीच दुरी नहीं होना चाहिए, तथा पैर तने हुए होना चाहिए| इसके बाद साँस ले और शरीर के अगले भाग को ऊपर की और उठाये| इस वक्त एक बात का ख्याल रहे की कमर पर ज्यादा खिंचाव ना आने पाए| कुछ सेकंड्स इसी अवस्था में बने रहे| फिर गहरी सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाये| शुरुवाती दौर में इसे दो से तीन बारे करे और धीरे धीरे करने का समय बढाते जाये|

भुजंगासन करने के लाभ:

  • इस आसन के करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
  • इससे शरीर में रक्त और ऑक्सीजन का संचार होता है
  • यह पेट की चर्बी को घटाकर मोटापे को कम करता है।
  • महिलाओं के प्रजनन और मासिक संबंधित समस्याओं में भुजंगासन एक रामबाण की तरह काम करता है।
  • यह आसन भूख को बढ़ाने में मददगार है तथा कब्ज की समस्या को भी दूर करता है।
  • यह आसन उदर के सभी संबंधित अंगों, विशेष रूप से गुर्दो के लिए लाभदायक है।
  •  इससे शरीर लचीला और फुर्तिला होगा।
  • गला संबंधित समस्या में भी यह आसन गुणकारी है|
  • यह आसन महिलाओं के प्रजनन सम्बन्धी विकारों को जैसे प्रदर, कष्टप्रद मासिक धर्म और अनियमित मासिक धर्म आदि के कष्ट को दूर करने में सहायक है।
  • साधारण तौर पर गर्भाशय और अण्डाशय को भी इस आसन से लाभ पहुंचता है।
  • यह आसन शरीर को लचीला, स्वस्थ व पुष्ट बनता है।
  • स्लिप डिस्क सम्बन्धी छोटे-मोटे दर्द को तथा पीठ के समस्त प्रकार के दर्दो को यह आसन रामबाण की तरह काम करता है।
  • जिन लोगों को तनाव और थकान की समस्या सताती है उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए।
  • यह आसन दिल और फेफड़ों के मार्ग को साफ करने में भी मदद करता है।

4. Marjariasana in Hindi || मर्जरियासन योग:

बिल्ली को मार्जर भी कहते हैं, इसलिए इसे मर्जरियासन कहते हैं। यह योग आसन शरीर को उर्जावान और सक्रिय बनाये रखने के लिए बहुत फायदेमंद है। इस आसन से रीढ़ की हड्डियों में खिंचाव होता है जो शरीर को लचीला बनाता है।

yoga cat pose

विधि :

  • अपने घुटनों और हाथों के बल आये और शरीर को एक मेज़ कई तरह बना लें अपनी पीठ से मेज़ का  ऊपरी हिस्सा बनाएं और हाथ ओर पैर से मेज़ के चारों पैर बनाएं।
  • अपने हाथ कन्धों के ठीक नीचे, हथेलियां ज़मीन से चिपकी हुई रखें और घुटनो मेँ पुट्ठों जितना अंतर रखें।
  • गर्दन सीधी नज़र सामने रखें।
  • सास लेते हुए अपनी ठोड़ी को ऊपर कि ओर सर को पीछे की और ले जाएँ, अपनी नाभि को जमीन की और दबाएं और अपनी कमर के निचे के हिस्से को छत की ओर ले जाएँ. दोनों पुटठों को सिकोड़ लें| क्या आप थोड़ा खिंचाव महसूस कर रहें हैं?
  • इस स्थिति को बनाएँ रखें ओर लंबी गहरी साँसें लेते और छोड़ते रहें।
  • अब इसकी विपरीत स्थिति करेंगे साँस छोड़ते हुए ठोड़ी को छाती से लगाएं ओर पीठ को धनुष आकार में जितना उपर हो सके उतना उठाएं, पुट्ठों को ढीला छोड़दें।
  • इस स्थिति को कुछ समय तक बनाएँ रखें और फिर पहले कि तरह मेज़नुमा स्तिथि मेँ आ जाएँ।

फायदे:

  • रक्त का सुचारू रूप से प्रवाह होता है।
  • कंधों और हाथो कि क्षमता बढ़ाता है।
  • तन और मन को शांत करता है।
  • पाचन प्रक्रिया की ग्रंथियों की मालिश करता है।

सावधानिया:

  • अगर आपके पीठ , पेट और गरदन मे दर्द है तो विशेषज्ञ की सलाह लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *